मराठी नव वर्ष गुड़ी पाड़वा का इतिहास

मराठी नव वर्ष गुड़ी पाड़वा की शुरुआत जैन इतिहास के महानतम आचार्य माधवानन्द के पुत्र राजा शालिवाहन ने सन् 1065 में पैठन से की थी।

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पूरे महाराष्ट्र से लेकर समूचे दक्षिण भारत को जीतकर उस पर अपना समूचा एक क्षत्र राज स्थापित होने की महान विजय के उपलक्ष में मराठी नव वर्ष “गुड़ी पाड़वा” की शुरुआत सन 1065 में जैन राजा शालिवाहन ने की। इस विजय के उपलक्ष में पैठन में एक कलात्मक मान स्तम्भ की भी स्थापना की गई, जो आज भी इसका श्रेष्ठ साक्षी है।


पैठन का प्राचीन इतिहास

पैठन का नाम पहले प्रतिष्ठापुर था, जो वहाँ आदिनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा के बाद पड़ा। इससे पहले भी यह नगर तीर्थंकरों की नगरी के रूप में पंचतेश्वर के नाम से जाना जाता था। आदिनाथ सहित जैन मंदिर तीर्थों की वजह से यह स्थान प्रसिद्ध था।

यह नगर गोदावरी नदी के किनारे बसा हुआ था, जो बाद में भीषण बाढ़ के कारण तबाह हो गया। इसके बाद उसी स्थान पर A.D. 65 में पुनः पैठन का निर्माण हुआ।


सातवाहन काल और जैन प्रभाव

इस क्षेत्र पर पहले सातवाहन साम्राज्य का अधिकार हुआ, जो समर्पित जैन शासन था। इसके बाद सिमुक राजा बना, जिसने पैठन में दर्जनों जैन मंदिरों का निर्माण कराया।


राजा शालिवाहन का साम्राज्य

इसके बाद राजा शालिवाहन ने अपना साम्राज्य स्थापित किया। उन्होंने अपने अपार युद्ध कौशल और अपूर्व पराक्रम से संपूर्ण दक्षिण भारत में विशाल साम्राज्य स्थापित किया।

इसी महान विजय के उपलक्ष में 1065 में मराठी नव वर्ष गुड़ी पाड़वा की शुरुआत की गई।


पैठन की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता

  • यही पैठन वह स्थान है जहाँ मराठी पंचांग का निर्माण हुआ।
  • यहीं तीर्थंकर आदिनाथ की प्राचीनतम प्रतिमा जमीन से प्राप्त हुई, जिसे तीर्थंकर मुनिसुब्रत स्वामी मंदिर में प्रतिष्ठापित किया गया।

जैन इतिहास में पैठन का महत्व

पैठन का इससे भी महान इतिहास यह है कि:

  • जैन इतिहास के महानतम आचार्य भद्रबाहु स्वामी का जन्म यहीं हुआ।
  • सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जैन मुनि बनने से पहले इसी भूमि पर आए थे।
  • सम्राट शालिवाहन, महान जैन आचार्य माधवाचार्य जी के पुत्र थे और उनका साम्राज्य जैन साम्राज्य था।

शोध और ऐतिहासिक उल्लेख

जैन वांगमय के अनुसार जैन इतिहास के शोधकर्ताओं ने विभिन्न ग्रंथों से जानकारी जुटाकर पैठन के बारे में लिखा है:

“The Idol of thirthankar Munisurvat was consecrated Lord *Rama when he became a Jain sage”


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सोहन मेहता “क्रान्ति”
जोधपुर, राजस्थान
जैन इतिहास के खोजी व शोधार्थी लेखन