विक्रम संवत् की रचना व काल दर्शन की गणना का निर्माण महान जैनाचार्य कालकाचार्य की ही देन है…………!

🐧🐧🐧विक्रम संवत् की रचना व काल दर्शन की गणना का निर्माण महान जैनाचार्य कालकाचार्य की ही देन है…………!🐧🐧🐧🐧

चैत्रपदी नवसंवत्सर याने विक्रम संवत् का हिन्दू याने वैदिक मान्यता का नव वर्ष का प्रारम्भ का आज शुभ दिवस है वैसे हिन्दू याने वैदिक परम्परा में कई कई ओर संवत् भी है जिन्हें देश में अलग अलग प्रदेशों में हिन्दू वर्गों में मनाए जाते जिसमे विक्रम संवत् के बाद शक संवत् सबसे प्रमुख है मगर विक्रम संवत् की मान्यता हिन्दुओं में सर्वाधिक है.वैसे भारत में दर्जनों संवतों के बावजूद इस देश में सबसे अधिक प्राचीन संवत् वीर संवत् है.

जो महाप्रभु महावीर के निर्वाण दिवस से प्रारम्भ होता है.एक समय था जब पूरे देश में दीपावली से ही नव वर्ष प्रारम्भ करने की परम्परा की सर्वसम्मत मान्यता थी.मगर कुछ सौ वर्षों से देश में दीपावली की जगह विक्रम संवत् को ही नव वर्ष वाली मान्यता को व्यापक रूप से स्थापित किया गया है.वैसे देश में जैनों,बौद्धों, सिखों पारसियों,मुस्लिमों, ईसाइयों में नव वर्ष के अलग संवत् व व्यवस्था अभी भी विद्यमान है. उसी तरह से हिंदुओं में कई ऐसे छोटे वर्ग समूह है जिनमे नव वर्ष की अलग अलग व्यवस्था है, जैसे पंद्रह करोड़ से अधिक आदिवासी अपना नव वर्ष अलग मनाते है और वे अपने को हिन्दू धर्मी नहीं बल्कि सरन धर्मी बताते है,उसी तरह दक्षिण राज्यों में करोड़ो लिंगायत अपने को हिन्दू नहीं मानते वैसे पूर्वोतर राज्यों के वनवासी भी अपने को हिन्दू धर्मी होने से इंकार करते है.कुल मिलाकर इस देश का कोई सर्वसम्मत नया वर्ष नहीं और चाहे जितना प्रचार करें और इसे हिन्दू वर्ष के रूप में मनाने का आव्हान करे मगर सारे व सर्व धर्मी ही नहीं बल्कि हिन्दू धर्मी भी 99.90% प्रतिशत अंग्रेजी कैलेंडर के बताए नव वर्ष के अलावा देश में किसी में कोई अन्य नव वर्ष चलता ही नहीं है.

सत्य तो यह है कि स्वयं हिंदुओं को यदि पूछा जाय कि आज क्या तिथि,कौनसा विक्रम संवत् और कौनसा विक्रमी महीना है तो एक प्रतिशत भी नहीं बता पाएंगे. अंग्रेजी डेट,मंथ और ईयर पूछो तो शायद ही कोई होगा जो इसे नहीं बता पाएगा.आम लोगों को हिन्दू नव वर्ष धूमधाम से मनाना है इसकी भी जानकारी आम लोगों को सोशियल मीडिया व अन्य प्रचार से ही मालूम पड़ती है. मगर आपको जानकार यह आश्चर्य से भरा लगेगा कि जिस विक्रम संवत् की रचना कर उसी पर आधारित कैलेंडर जो काल दर्शन की गणना पर आधारित है यह उस युग के महान महाराजा विक्रमादित्य के युग से लागू हुआ है. विक्रमदित्य द्वारा बड़ी महाविजय पाने पर उस युग के कालकाचार्य जैसे महानतम जैनाचार्य ने महाराजा की विजय पर उनके सम्मान में जो पारितोषिक प्रेषित किया वो विक्रम संवत् व उसकी काल गणना का यही दस्तावेज था जो दुनिया में काल दर्शन याने काल गणना का कैलेंडर जिसे हिन्दू नव वर्ष का दर्पण कहते है.

ज्ञात रहे कि महान युगांतकारी जैनाचार्य कालकाचार्य जी उस युग में काल गणना व ज्योतिषी ज्ञान व विज्ञान की प्रज्ञा की विद्वता के महान भंडार व विश्व के मान्य महान विशेषज्ञ थे.सबसे बड़ी बात यह कि महाराजा विक्रमादित्य कालकाचार्य,उनके अपूर्व ज्योतिष ज्ञान व काल गणना की उनकी अभूतपूर्व विद्वता के जबरदस्त कायल ही नहीं थे बल्कि वे उनका गहरे दिल से सम्मान भी करते थे.कालकाचार्य जी ने जो संवत् तैयार किया वो विक्रमादित्य के नाम पर विख्यात हुआ और जो गणना वाला दस्तावेज रूपी चार्ट जिसे अंग्रेज़ी में कैलेंडर कह सकते है,उस तिथि गणना के दस्तावेज को कालकाचार्य के नाम पर इसे काल दर्शन याने काल गणना के रूप में प्रसिद्धि मिली.यही विक्रम संवत् का मूल व प्रमुखतम आधार है.

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पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज