राजपूत और जैन धर्म
🏰 राजपूत और जैन धर्म
वैसे तो राजस्थान और पड़ोसी राज्यों में जैन धर्म का इतिहास लगभग 2500 वर्ष पुराना माना जाता है, लेकिन इस प्रदेश में जैन धर्म का विशेष विकास राजपूत काल में तेजी से हुआ।
मेवाड़, मारवाड़ और राजस्थान के अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास के कई प्रदेशों में भी राजपूतों के संरक्षण और प्रभाव के कारण जैन धर्म एक जन-धर्म के रूप में विकसित हुआ।
🛕 राजपूत राजाओं का संरक्षण
ज्यादातर राजपूत राजा शैव धर्म के अनुयायी थे, लेकिन उनके शासन और निजी जीवन में जैन धर्म का भी लगभग उतना ही महत्व था जितना शैव धर्म का।
इसी कारण राजपूतों के लगभग हर किले और नगर में जैन मंदिरों का निर्माण कराया गया।
👑 जैन मुनियों का सम्मान
राजपूत राजा और रानियाँ जैन मुनियों को अत्यंत सम्मान देते थे।
वे उनसे धार्मिक उपदेश और मार्गदर्शन प्राप्त करते थे और कई बार उनके संरक्षण में जैन धर्म के प्रचार-प्रसार को भी बढ़ावा दिया जाता था।
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