श्री अमीझरा अजितनाथ चौमुख जिनप्रासाद
ध्रांगधा से 14 किमी एवं हलवद से 14 किमी दूर, राजमार्ग पर स्थित यह अद्भुत चौमुख जिनालय दक्षिण भारत की द्राविड शैली एवं उत्तर भारत के देलवाड़ा–राणकपुर जैसे शिल्प का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है।
पीले पाषाण से निर्मित यह मंदिर भारत ही नहीं, बल्कि विश्व की अद्वितीय, अतुलनीय एवं दर्शनीय कृतियों में से एक माना जाता है।
शिल्प एवं वास्तुकला की विशेषताएं
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मंदिर में ऊँचे द्राविड शैली के शिखर
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प्रत्येक सीढ़ी पर गज समूह (हाथी) का शिल्प-लांछन
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श्याम वर्ण के विशाल पाषाण पर निर्मित विभिन्न अप्सराएँ
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जन्मकल्याणक से जुड़े सुन्दर पट्ट
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स्तम्भ, तोरण, छत्र एवं गुम्बद पर अद्भुत नक्काशी
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भूतल से लेकर शिखर तक दिव्य शिल्प सौंदर्य
मूलनायक श्री अजितनाथ प्रभु
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300 वर्ष से अधिक पुरानी प्राचीन प्रतिमा
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प्रतिष्ठा: वि.सं. 2067, पौष वदी-5
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प्रतिष्ठाचार्य: आचार्यश्री तीर्थभद्रसूरीजी
परिकर विवरण:
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श्री आदिनाथ प्रभु → 16 विद्यादेवी
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श्री मुनिसुव्रत स्वामी → 8 सरस्वती
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श्री महावीर स्वामी → 8 प्रतिहार्य
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काष्ठकला-युक्त द्वार
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नर-मादा घण्ट
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भव्य प्रवेशद्वार
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छत्र, गुम्बद, तोरण आदि
परिसर की सुविधाएँ
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उपाश्रय
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भोजनशाला
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धर्मशाला
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विशाल व शांत वातावरण
तीर्थ का पता
श्री अमीझरा अजितनाथ जिन प्रासाद
श्री तारंगा विहार धाम
श्री श्रमण सेवा धार्मिक न्यास
हलवद–ध्रांगधा राजमार्ग
पोस्ट – चूली, जिला सुरेन्द्रनगर, गुजरात
📞 फोन: 6353232476
प्रमुख / उप-प्रमुख संपर्क
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प्रमुख: श्री हसमुखभाई पी. शाह, धांगधा
📞 9825231528 -
उप प्रमुख: श्री अमृतभाई अेन गड़ा (शाह)
📞 9967031711 -
पत्रव्यवहार:
श्री नवकार इन्वेस्टमेंट, ग्रीन चौक, धांगधा
📞 9429110425