⛺️🙏 देवाधिदेव 23 वे तीर्थंकर श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान के गर्भ कल्याणक की तिथी 🙏⛺️

वैशाख कृष्णा द्वितीया, वी. सं. 2552, शनिवार, दि. 4 अप्रैल, 2026
सभी धर्मप्रेमियों को हार्दिक बधाइया और मंगल शुभकामनाये 🙏🥁🎺🌹🏵️🌺


(उत्तर पुराण के आधार से)

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

“दूज कृष्ण वैशाख को, प्राणत स्वर्ग विहाय।
वामा माता उर बसे, पूजूँ शिव सुखदाय।।”

ॐ ह्रीं वैशाखकृष्णद्वितीयां गर्भमंगलमंडिताय श्रीपार्श्वनाथ
जिनेन्द्राय नमः अर्घ्यं •••••••

卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐


🌿 तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ के पूर्व भव

1. मरुभूति मंत्री

जब पोदनपुर नगर के राजा अरविन्द के मंत्री मरुभूति प्रेम के वशीभूत हो कर अपने व्यभिचारी भाई कमठ को मनाने तापस आश्रम गये, तब क्रोध के आवेश में कमठ ने उसके हाथ की शिला मरुभूति के सिर पर पटकने से मरुभूति मरकर सल्लकी वन में वज्रघोष नाम का हाथी हो गया।

2. वज्रघोष हाथी

मुनिराज बने अरविन्द से श्रावक के व्रत ले कर जब हाथी वज्रघोष तपश्चरण कर रहा था, तब कुक्कुट सर्प बने दुराचारी कमठ के जीव ने पूर्व वैर के संस्कार वश हाथी को काट खाया। मरते समय हाथी ने महामंत्र का स्मरण किया।

3. बारहवे स्वर्ग में देव

हाथी महामंत्र के स्मरण से मरकर देव हुआ और काटनेवाला सर्प मरकर तीसरे नरक गया।

4. राजपुत्र रश्मिवेग

जब समाधिगुप्त मुनिराज से दीक्षित देव से बाद में बने युवा मुनि रश्मिवेग योग धारण कर गुफा में विराजमान थे, तब अजगर बने कमठ के जीव ने उन्हें निगल लिया।

5. सोलहवें स्वर्ग में देव

मुनि रश्मिवेग देव हुये और अजगर मरकर छठे नरक गया।

6. वज्रनाभि चक्रवर्ती

सोलहवें स्वर्ग से आकर बने चक्रवर्ती वज्रनाभि ने साम्राज्य का वैभव त्यागकर जिनदीक्षा ली। जब वन में आतापन योग में वे विराजमान थे, तब भील बने वैरी कमठ के जीव ने उन मुनिराज पर भयंकर उपसर्ग किया।

7. मध्यम ग्रैवेयक में श्रेष्ठ अहमिन्द्र

मुनिराज अहमिन्द्र बने और पापी भील नरक गया।

8. मंडलेश्वर राजा आनंद

राजवैभव से विरक्त राजा आनंद ने समुद्रगुप्त मुनिराज के पास दीक्षित हो कर ग्यारह अंगों का अध्ययन किया और सोलहकारण भावनाओं से तीर्थंकर प्रकृति का बंध किया। पर नरक से निकलकर सिंह बने कमठ के जीव ने आनंद मुनि पर कंठ पकड़कर किये उपसर्ग से विचलित न होते हुये मुनिराज आनंद मरकर सोलहवें अच्युत स्वर्ग के प्राणत नामक विमान में इंद्र हुए।

9. दिव्य आयु

बीस सागर की आयु और साढ़े तीन हाथ ऊंचा शरीर वाले सोलहवें स्वर्ग के इंद्र ने दिव्य सुखों का अनुभव किया और सिंह का जीव नरक जा कर भयंकर दुःखों का अनुभव करता रहा।

10. तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ

🏵️🌹🌷🏵️🌹🌷🏵️🌹🌷🏵️🌹🌷🏵️🌹🌷🌹


🙏🚩⛺️ तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथजी का परिचय ⛺️🚩🙏

  • जन्मकाल: तीर्थंकर श्रीमहावीर भ. के करीब 250 वर्षपूर्व
  • जन्मस्थान: काशी देश की आध्यात्मिक नगरी बनारस
  • पिता: उग्रवंशी काश्यपगोत्री राजा अश्वसेन
  • माता: वामा रानी
  • गर्भतिथि: वैशाख कृ. 2

💜💛 तीर्थंकर का गर्भकल्याणक महोत्सव 💛💜

☀️ तीर्थंकर की माता के आंगनमे तीर्थंकर के गर्भ में आनेसे 6 माह पूर्व से तीर्थंकर के जन्मतक (अर्थात 15 माह तक) प्रतिदिन 4 बार 3.5 करोड़ रत्नों की वर्षा कुबेर ने की ।

☀️ गर्भ से पूर्व जिनमाता वामादेवी को तीर्थंकर-सूचक 16 स्वप्न दिखाई दिये।

☀️ गर्भस्थ तीर्थंकर शिशुकी इंद्रादि देवों ने स्तुति की, तीर्थंकर के माता-पिता को प्रणाम किया और जन्मनगरी बनारस की परिक्रमा की।

☀️ सौधर्म इंद्र द्वारा नियुक्त दीक्कुमारी देवियो ने जिनमाता की सेवा की, मनोरंजन किया, उत्सव किये, जिनमाता की आराधना की।


🌟 जीवन परिचय

  • जन्मतिथि: पौष कृष्ण एकादशी
  • जन्म नक्षत्र: विशाखा
  • वैराग्यकारण: जातिस्मरण
  • दीक्षातिथि: पौष कृष्ण 11
  • केवलज्ञानतिथि: चैत्र कृ. 4
  • चिन्ह: सर्प
  • आयु: 100 वर्ष
  • ऊंचाई: नौ हाथ
  • हरित वर्ण कांति
  • यक्ष: मातड्.ग
  • यक्षिणी: पद्मावती

🌄 निर्वाण

  • निर्वाण तिथि: श्रावण शुक्ला 7
  • निर्वाण नक्षत्र: विशाखा
  • निर्वाणकाल: प्रातःकाल
  • मोक्षस्थान: Shikharji
  • सहमुक्त मुनि: 36

💥💟🌲🌳🌴💥💟🌲🌳🌴💥💟🌲🌳🌴💥


🙏 श्री पार्श्वनाथजिनेन्द्र के चरणों में कोटी कोटी प्रणाम 🙏

🙏🏝️🌅🕉️ ह्रीं श्रीपार्श्वनाथजिनन्द्राय नमः 🌅🏝️🙏

⛺️🥁🎺🌺🏵️🌹 श्री पार्श्वनाथ भगवान के गर्भ कल्याणक की जय 🌷🏵️🌺🌹🎺🥁⛺️


(लेखक: आनंद जैन कासलीवाल)

卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐