कल पुणे में विराट हिंदू सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

अहिंसा, जीवदया, शाकाहार और व्यसनमुक्ति के कार्यों के लिए मुझे अविनाश धर्माधिकारी द्वारा सम्मानित किए जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इस विराट अधिवेशन में जैन धर्म के सिद्धांतों और उसके सनातन संदेश को सभी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला, जिसके लिए मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानता हूँ।

जैन धर्म एक प्राचीन, प्री-वेदिक धर्म है — यह संदेश व्यापक हिंदू समाज तक पहुँचाने में हम सफल रहे। वेदों में भी भगवान आदिनाथ की स्तुति तथा भगवान नेमीनाथ का आदरपूर्वक उल्लेख मिलता है।

मुझे जिन धर्म का ध्वज अजैन समाज तक पहुँचाने का यह पावन अवसर प्राप्त हुआ, इसके लिए मैं हृदय से कृतज्ञ हूँ।

प्रभु चरणों में यही प्रार्थना है कि जिन धर्म की प्रभावना इसी प्रकार निरंतर होती रहे। 🙏