जैन धर्म का पतन कैसे हुआ?

अक्सर यह माना जाता है कि जैन धर्म का पतन शैव और वैष्णव धर्म के बलशाली होने से, राजाश्रय बंद होने के कारण हो गया. यह आरोप किया जाता है कि आदि शंकराचार्य, रामानुजन आदि शैव और वैष्णव आचार्यों ने जैन आचार्यों को वाद-विवाद में पराजित किया या बल से जैनियों का धर्मपरिवर्तन किया, जैन धर्म को नष्ट कर दिया, जैन मंदिरों को शैव या वैष्णव मंदिरों में परिवर्तित किया गया.

लेकिन हम जब टाईम लाईन देखते हैं, तब यह सब आरोप झूठे साबित हो जाते हैं.

वास्तव में जैन धर्म 13वी सदी तक, और कई स्थानों पर 16 वी सदी तक भारत के कई प्रदेशों में एक मुख्य धर्म था. भारतीय समाज में जैन धर्म का पालन करने वालों की संख्या काफी अच्छी थी. देश के कई भागों में, विशेषकर दक्षिण और पश्चिम भारत में यह एक जन धर्म बन चूका था. भारतीय समाज के सभी स्तरों में जैन धर्म के अनुयायी पाए जाते थे. इसके कई ऐतिहासिक प्रमाण हैं. ….

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