जयंती विशेष … भामाशाह जिनका नाम ही देश धर्म के लिये सर्वस्व बलिदान का पर्याय बन गया ।

जयंती विशेष … #भामाशाह जिनका नाम ही देश धर्म के लिये सर्वस्व बलिदान का पर्याय बन गया । #बलिदान भी एसा की आज जो कोई भी #समाज_हित में कुछ भी त्याग करता हैं तो उनके नाम से जाना जाता हैं ।
स्वनाम धन्य भामाशाह ने #हिंदुवा सूरज प्रातः स्मरणीय #महाराणा_प्रताप को ना केवल अपनी सारी जमा पूँजी समर्पित कि बल्कि देश धर्म की रक्षा के लिये उनके कंधे से कंधा मिला कर रण भूमि में अपनी #तलवार का जौहर भी दिखलाया ।
#हल्दी_घाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप के लिए उन्होंने अपनी निजी सम्पत्ति में इतना #धन_दान दिया था कि जिससे 25000 सैनिकों का बारह वर्ष तक निर्वाह हो सकता था। प्राप्त सहयोग से महाराणा प्रताप में नया उत्साह उत्पन्न हुआ और उन्होंने पुन: सैन्य #शक्ति_संगठित कर तथाकथित महान …अकबर मुगल को पराजित किया और फिर से मेवाड़ का राज्य प्राप्त किया।
भामाशाह का जन्म पाली ज़िले के भारमल जी ओस्तावल जैन के यहाँ हुआ, भारमल जी जैन रणथम्भोर के क़िलेदार थे
आओ एसे महादानी वीर भामाशाह को उनके जन्म दिवस पर कृतज्ञ भाव से नमन करें ।