इन्दिरा गाँधी के दिल दिमाग़ पर जैन धर्म का अदभुत प्रभाव था …….!

🐧🐧🐧🐧🐧🐧आपातकाल के बाद चुनाव हार जाने और देश भर में उनके प्रति बढ़ती बेहद घृणा व विरोध के चलते अकेली अपने संकट व त्रासदी से बुरी तरह घिरी हुई थी तब यकायक प्रख्यात तांत्रिक चंद्रा स्वामी जो स्वयं जैन थे,उनके संपर्क में आई तो चंद्रा स्वामी ने कहा आप धैर्य रखो मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आप फिर से प्रधानमंत्री बनोगी किन्तु आपको मैं कहूँ जैसे करना होगा,तो इंदिराजी ने तपाक से कहा कि आप जो कहोगे वैसे मैं करूँगी मगर इतिहास इस बात का साक्षी है कि एक बार जो दिल्ली सल्तनत से उतारा वो कभी दुबारा शासक नहीं बना तो चंद्रा स्वामी ने कहा कि यह चमत्कार होगा,मैं करके दिखाऊँगा.उन्होंने इन्दिरा गाँधी से कहा कि आप हर सुबह जैन भक्ताम्बर का पाठ सुनोगी और पाँच जैन नवकार सीधे और पाँच नवकार उलटे पढ़ोगी.चंद्रा स्वामी तांत्रिक ही नहीं बल्कि राजनैतिक लोगों के सलाहकार और हर पार्टी के नेताओं के सम्पर्क में रहते थे.एक दिन दिल्ली मैं भैरोसिंह मंत्रिमंडल में मंत्री विज्ञान मोदी और मैं राजस्थान हाउस में सोने वाले ही थे कि नृसिंह राज भंडारी जो जोधपुर में कामरेड गुड गुड के नाम से जाने जाते थे,आपातकाल में गिरफ्तार होने से पहले विज्ञान मोदी और मैंने उनके यहाँ अज्ञातवास में सात दिन बिताए,वे गुड गुड़सा चंद्रा स्वामी के साथ हमसे मिले.तब से चंद्रा स्वामी से हमारे संपर्क खूब प्रगाढ़ रहे. चंद्रा स्वामी ने इंदिराजी को अनेकों जैन आचार्यों के दर्शन करवाए और इंदिराजी ने जैन आचार्यों की सलाह पर अपनी पार्टी का चुनाव चिह्न हाथ कर दिया.चन्द्रा स्वामी उन्हें श्रवण बेलगोला ले गए. वहाँ इंदिराजी ने बड़ी तन्मयता से आरती की और दो घंटे तक ध्यान लगाया, वापिस लौट चुनाव में लग गई,जैन आचार्यों द्वारा सुझाए हाथ के चुनाव चिह्न पर ही इंदिराजी के नेतृत्व में काँग्रेस जीती,इंदिराजी प्रधानमंत्री बनी और चन्द्रा स्वामी के पत्थर तिरने लगे,चलते संसद के बीच वे दर्शनार्थ श्रवण बेलगोला गई और पूरे दो दिन रहकर लौटी तो संसद में इसी पर विपक्ष ने उनपर दो दिन ख़राब करने व जैन धर्म पर कड़ा प्रहार करते पूछा कि क्या आप जैन धर्मी हो गई हो क्या,तब उन्होंने कहा कि मुझे ही नहीं देश के हर व्यक्ति को जैन धर्मी होना चाहिए.प्रतिवाद बढ़ने पर इंदिराजी ने संसद में गरजते कहा कि जैन धर्म दुनिया का महानतम धर्म है,मैं इसकी प्रशंसक ही नहीं उपासक बन गई हूँ,मेरे पिता नेहरूजी तो हमेशा कहते थे कि भारत का सबसे प्राचीन व मूल धर्म जैन धर्म ही है.मेरी दिली चाहत है कि आप सबको भी जैन धर्म को पढ़ना और समझना चाहिए,जैन धर्म से बहुत कुछ सीखना चाहिए,इंदिराजी के कथन अखबारों में छपे तो अखबारों में आया कि गिरिराज जैन नेहरू जी के अभिन्न मित्र थे और जैन धर्म पर दोनों खूब चर्चा करते थे और नेहरू जी का जैन धर्म से इतना लगाव था कि उन्होंने अपना पी एस याने प्राइवेट सेक्रेटरी भी सीनियर जैन आ ए एस को ही नियुक्त किया,जो कई वर्षों तक रहे.
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पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.