मैत्री विचार
🙏• मैत्री विचार •🙏 🙏• मैत्री विचार•🙏 •मुनिश्री क्षमासागर जी• ----------------- "योगः कर्म सुकौशलम्" अर्थात् "कर्म की कुशलता ही ध्यान है, योग है " आज पूज्य मुनिश्री क्षमासागर जी महाराज समझाते हैं कि जैसे हम दूसरों की शारीरिक हानि को देखकर स्वयं को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, वैसे ही उनके क्रोध को देखकर हम क्यों [...]