पारसनाथ आस्था का केंद्र है, विवाद का नहीं

पारसनाथ न्यूज़ अपडेट।
पारसनाथ पर्वत वंदना के क्रम में कुछ जैन श्रद्धालुओं द्वारा अन्य समुदायों के पारसनाथ आगमन पर टिप्पणी की गई जिसको लेकर सोशल प्लेटफार्म पर बहस तेज हो गई।
इस बाबत मै कहना चाहूंगा कि पारसनाथ पर्वत यात्रा को आए जैन श्रद्धालुओं जिन्होंने देखा कि किसी अन्य समुदाय के द्वारा जैन धर्म के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल पारसनाथ पर जूते चप्पल पहनकर चढ़ाई कर रहे हैं ,,,शुद्धता की ख्याल रखे बगैर मंदिरों में प्रवेश कर रहे तो उनकी भावना आहत हुईं और जैन श्रद्धालु ने उन्हें टोका दोनों तरफ से तीखी बहस हुई जिसे कैमरे में कैद कर लिए गया जिसके बाद सोशल साइट पर डाल दिया गया देखते ही देखते वह वीडियो वायरल हो गई।

अब इस मुद्दों को जहां स्थानीय लोगों द्वारा उन जैन तीर्थयात्रियों की भावना का कदर करते हुए इससे उनकी भावना आहत हुईं तो उन्होंने बोला बस बात खत्म पर इस वीडियो को अन्यनलोगों द्वारा तुल दिया जा रहा है।
वैसे व्यक्ति पारसनाथ से संबंधित इस वीडियो को तुल देते हुए एक विवाद स्टैबलिशट करने का प्रयास कर रहे हैं वह सही नहीं है कृपया कर इसे राजनीति रूप न दें यह धर्म स्थल है धर्म स्थल रहने दें राजनीति का अखाड़ा न बनने दें।
आपको मालूम होना चाहिए पारसनाथ पर्वत के आस पास निवास करने वालों के लिए यह पर्वत की औद्योगिक केंद्र से कम नहीं।लाखों लोगों के लिए रोजी रोजगार का केंद्र बिंदु है।
पारसनाथ आने वाले तीर्थ यात्रियों से हजारों लोगों को रोजगार मुहैया कराई जाती है।

पर्वत से लेकर मधुबन तक सैकड़ों दुकानदार है जो व्यवसाय से जुड़े हैं।

साल में तीन महीने जब तीर्थ यात्री का आना बिल्कुल ठप पड़ जाता है तो मधुबन समेत आस पास के लोगों की आर्थिक स्थिति चरमरा जाती है।
इसलिए आप सब से निवेदन है कि जहां तक हो सके पारसनाथ का माहौल शांतिपूर्ण रहे किसी तरह की विवाद न पनपने पाएं इसी में सबों की खुशी है।
दो दिन का त्योहार था सदानंद सम्पन्न हुआ खुश होकर लोग अपने अपने स्थान को वंदना कर लौट गए हैं अब कहीं कोई किंतु परंतु नहीं है इस मामले को अब ज्यादा तुल न दें।

🙏🙏🙏पारसनाथ प्रकृति का दिया हुआ एक उपहार है इस उपहार को स्वच्छ पवित्र व सुंदर बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है।