“जैन समाज संवैधानिक अधिकार दिवस” की शुभकामनाएं💐
वर्ष 2014 में आज 27 जनवरी को तत्कालीन केंद्र सरकार ने जैन समाज की 21 वर्षो की लम्बी मांग के बाद धार्मिक रूप से कम जनसँख्या के आधार पर जैन धर्म को अन्य पांच अल्पसंख्यक धर्म के समान भारत का संवैधानिक रूप से स्वतंत्र धर्म घोषित किया। आज “जैन समाज संवैधानिक अधिकार दिवस” की शुभकामनाएं💐 …विश्व जैन संगठन
भारत की जनगणना धार्मिक आधार पर होती है जिसमे प्रमुख रूप से 6 मुख्य धर्म है जिसमे पांच सिख, मुस्लिम, ईसाई, पारसी, बौद्ध धार्मिक आधार पर जनगणना में कम होने पर अल्पसंख्यक धर्म घोषित कर दिए गए जिससे जैन धर्म की स्वतंत्र पहचान पर प्रश्न चिन्ह लग गया क्योंकि जैन धर्म किसी अन्य धर्म का हिस्सा नहीं है अपितु भारत का प्राचीनतम स्वतंत्र धर्म है।
जैन समाज की मांग पर दिनांक 31 जनवरी 1950 को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जैन धर्म को स्वतंत्र मानते हुए पत्र जारी किया गया था और 2007 में गुजरात सरकार द्वारा लाए गए धर्म अंतरण बिल को जैन समाज के विरोध के कारण राज्यपाल द्वारा वापिस किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुंडलपुर केस में जैन धर्म के अल्पसंख्यक धर्म होने के कारण विशेष अधिकार हेतु लिखा गया है!
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम के अंतर्गत अल्पसंख्यकता जैनों को दी गई थी।तत्कालीन केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री द्वारा जैन समाज की मांग और अनशन की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार के निर्णय की जानकारी👇🏽
https://youtu.be/bzi5FHq012E?si=b7jOvo2XqVaLV_kf
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