विश्व धर्म दिवस पर आओ चिंतन करें और हमारे देश को इसका रहनुमा बनाएँ….!
विश्व धर्म दिवस पर आओ चिंतन करें और हमारे देश को इसका रहनुमा बनाएँ….!
🐧🐧🐧आज विश्व धर्म दिवस है और पूरे विश्व में शांति,अमन,चैन और विश्व कल्याण की चीर स्थाई कामना और याचना के साथ मानवमात्र की भलाई और मानवीय मूल्यों की जीवंतता के लिए भारत के तमाम मूल धर्म चाहे वो वैदिक धर्म हो,सिख,बौद्ध,जैन,लिंगायत,दक्षिण की द्रविड़वादी धर्म व्यवस्था हो या फिर करोड़ों करोड़ो तमाम तरह के आदिवासियों का सरण धर्म हो,उनका एक मात्र अंतिम लक्ष्य वसुधैव कुटुम्बकम ही रहा है.श्रेष्ठ धर्म वही है जो प्रेम,करुणा व दया का संदेश देता है और जहाँ धार्मिक उन्माद हो,धार्मिक कट्टरता की तुच्छ संकीर्णता हो या धार्मिक विषमता का ज़हर हो वहाँ सच्चा धर्म टिक ही नहीं पाता है.यह सत्य और ऐतिहासिक है कि जिन जिन देशों ने धार्मिक उन्माद की पाशविकता व कट्टरता की दैत्यता पर अपने देश को चलाया वे सारे के सारे देश तबाह होकर सत्यानाशी में डूब गए वहीं जिन जिन देशों ने सर्वधर्म सम्भाव,धार्मिक एकता व सहिष्णुता और धर्म निरपेक्षता को अपना आधार बनाया वे सारे के सारे देश दुनिया के श्रेष्ठ व महान देश बनकर विश्व सिरमौर बन गए.वे सारे देश समृद्धि,सम्पन्नता,ख़ुशहाली और अभूतपूर्व विकास के शिखर को छू गए.विश्व धर्म दिवस पर मंथन होना चाहिए कि हमारा देश भी प्रभु श्री राम की मर्यादा व नैतिकता,भगवान कृष्ण के कर्मवाद,भगवान बुद्ध की करुणा व दया,प्रभु महावीर की शांति,अहिंसा व जियो और जीने दो की महान अवधारणा और गुरु नानक दैव की ऊँच नीच को हटाकर सभी जीव के प्रति सम्मान,भाईचारा और सर्वधर्म सम्भाव की महान चाहना की अनुकंपा पर चलकर पूरी दुनिया के लिए हमारा देश आदर्श प्रेरणा का पाथेय बने. धर्म व अध्यात्म में हम विश्व के रहनुमा बने.
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पत्रकार:सोहन मेहता”क्रान्ति”जोधपुर,राज.