दिव्य प्रभा से युक्त महा चमत्कारी “श्री भरतेश्वर महामण्डल विधान”
जय आदि!
दिव्य प्रभा से युक्त महा चमत्कारी “श्री भरतेश्वर महामण्डल विधान” इसे महा विधान कहें या यूँ कहें महा काव्य या यूँ कहें श्री भरत भगवान का शास्त्र जिसे स्वयं संयम पुरुषोत्तम आचार्य भगवन श्री विशुद्धसागर जी महाराज लघु समयसार जी कहते है
जिसको संयम पुरुषोत्तम आचार्य भगवन 108 श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव के वचन अनुसार उनकी आज्ञा उनके उपदेश उनके आशीष पर मात्र 22 वर्ष की उम्र में महा कवि लघुनन्दन जैन द्वारा उनके पिता पंडित श्री राजेंद्र जैन जी के स्वाध्याय से 7 महीनो मे रात दिन एक करके बनाया गया जिस विधान मे श्री भरत भगवान का सम्पूर्ण विवरण है
उनकी पांच पांच पूजाये है उनके जन्म के स्वप्न है जो माता ने देखे कैसे उनका नाम भरत रखा और क्यों रखा भगवान श्री ऋषभदेव ने कैसे उनको पढ़ाया उनके रत्न निधि का वर्णन उनकी दिग्विजय यात्रा का वर्णन और सबसे ख़ास भरत का भारत कैसे इस देश का नाम उनके नाम पर भारत पड़ा और क्यों उनकी बताई हुई 53 क्रियायों के 53 अर्घ्य 108 ऐसे अर्घ्य अगर आप रोज अपने बच्चों को सुनाये तो उनका जीवन बदल जाए क्यूंकि बो अर्घ्य मानवीय जीवन को सही रास्ता दिखाते है कई बीज मन्त्र पूरे देवताओ के मन्त्र जैसे शान्ति विधान मे होते है 64 रिद्धि के अर्घ्य पूरी दिग्विजय के अर्घ्य भगवान के समवसरण का वर्णन भरत बाहुबली का युद्ध आदि आदि उनका पूरा जीवन उसमे चित्रित किया है जिस विधान को स्वयं आचार्य भगवन श्री विशुद्धसागर जी ने पूरा पड़ा है और उसपर आशीर्वाद लिखा है और कहा है इस कृति को सम्पूर्ण भारत कभी भुला नहीं पायेगा लघुनन्दन का नाम अमर रहेगा ऐसे महा विधान को जो एक बार करता बात करबाता है उसको रिद्धि सिद्धि पुत्र मोक्ष की प्राप्ति होती है संगीतमय विधान करबाने हेतु सम्पर्क करें वा ऐसी कृति आप अपने घर पर भी मगवा सकते है यह 80 पेज का विधान है या यूँ कहे भगवान भरत का संबिधान है जिसका पुनः प्रकाशनार्थ मूल्य 200 रूपये है कोरियर चार्ज फ्री रहेगा अगर आप 20 प्रतियाँ लेते है तो पुण्यार्जक मे आपका नाम जगह का नाम लिखा जाएगा संपर्क करें
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लघुनन्दन जैन
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