जय जय ऋषभ अहिंसा भारत
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जय जय ऋषभ अहिंसा भारत
- ऐतिहासिक रूप से पूरे विश्व ब्रह्माण्ड में शिवरूप भगवान ऋषभ देव सभी धर्मों में समान रूप से आदरणीय व पूज्यनीय है ।
- संक्षेप में, बृह्मांड नायक भगवान ऋषभ देव विश्व मे अलग अलग रूप मे कहीं आदम / बाबा आदम / कहीं जगन्नाथ /कही कैलाशपति सर्व मान्य है ।।
- उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों पर चलते हुए हम एक के बाद नये नये अभिनव कार्य करते रहते है ।
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चातुर्मास धर्माराधना का उत्कृष्ट अवसर ।
जीवन में बदलाव लाने, जीवन में परिर्वतन लाने एवं जीवन के मूल्यों को समझने का सबसे अहम समय है चातुर्मास। इस दौरान तप , जप, ध्यान , सामयिक , नित्य पूजन, के साथ साथ ज्यादा से ज्यादा जीव मात्र ( मानव कल्याण) के कल्याण के लिए सभी को बहुत बहुत कार्य करना चाहिए _ करते रहना चाहिए।
सभी धर्मों का मूल है दया ।
एक स्वाधर्मी विकलांग को सहायता करने के लिए हमारे धनीमानी परिचितजनों के पास महीने का सिर्फ १०००/ रुपिया तक देने का नही!!!!!
एक स्वधर्मी जरूरतमंद बहन को स्वनिर्भर बनाने हेतु एक सिलाई मशीन देने का कोई इच्छा नही __ बोलते है हमारे पास ( पैसे की ) व्यवस्था नही!!!!
फिर कहाँ है दया जो धर्म का मूल है???
इस समय भक्तलोग भगवान् को मन्दिर को सुंदरता से मनभावन सजाते है __ उनकी अनुमोदना।।
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हमने चातुर्मास मे नाना प्रकार के कठिन तप आराधना करने वाली जरूरतमंद सराक बहनों को साड़ी उपहार देना उचित समझा, मुंबई से आई हुई दो बहनों के हाथों से सभी धर्म आराधिका जरुरतमंद सराक बहनों को साड़ी ओढ़ाकर सम्मानित करवाया।।
जरूरतमंद माताओं-बहनों को साड़ी प्रदान कर उनके चेहरे पर जो मुस्कान देखी, वही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
“”ऋषभ अहिंसा भारत”” की पावन यात्रा यूं ही अनवरत चलती रहेगी।
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