श्री नवलखा पार्श्वनाथ भगवान का जिनालय

श्री नवलखा पार्श्वनाथ भगवान का जिनालय
दीव गुजरात

मूलनायक श्री नवलखा पार्श्वनाथजी प‌द्मानस्थ पीत वर्ण ७६ से.मी. प्रतिमाजी है।

समुद्र के मध्य बसे हुए दीव गाँव के मध्य यह प्राचीन मंदिर हैं। अजाहरा के इतिहास के अनुसार अजयपाल राजा सेना के साथ यहाँ पर पडाव डाल कर रहा था। “बृहत् कल्प सूत्र” में भी इस तीर्थ का उल्लेख देखने को मिलता हैं। कुमारपाल राजा ने यहाँ पर श्री आदीश्वर भगवान का मंदिर निर्माण करवाने का उल्लेख आता हैं। विक्रम संवत १६५० में पूज्य आचार्य श्री हीरसूरिजी महाराज ने यहाँ चार्तुमास किया। इस तीर्थ स्थल का सदियों पहले अद्भुत नाम था। कहा जाता हैं कि नवलाख की आंगी थी। उल्लेख के अनुसार प्रभुजी का मुकुट, हार, आंगी नव-नव लाख में बनवाये थे। सम्भव हैं कि इस कारण ही नवलखा पार्श्वनाथ इस प्रकार नाम प्रचलित हुआ होगा।