आत्मार्थी जीव को अपना आत्मस्वरूप समझने के लिए
आत्मार्थी जीव को अपना आत्मस्वरूप समझने के लिए ...आ...त्मा...र्थी... आत्मार्थी जीव को अपना आत्मस्वरूप समझने के लिए भीतर इतनी तड़प होती है कि वह दूसरों के मान-अपमान की ओर ध्यान नहीं देता; वह सोचता है, "मुझे तो अपने आत्मा को खुश करना है, मुझे संसार को खुश नहीं करना, संसार से अधिक आत्मा प्यारा लगता [...]