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वन मंत्रालय द्वारा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के संशोधन में मोर पंख को धार्मिक उपयोग हेतु प्रतिबन्ध मुक्त न रखने पर रोष

 



वन मंत्रालय द्वारा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम,1972 में संशोधन करके राज्य सभा में दिनांक 5 अगस्त 2013 को बिल न. 31 प्रस्तुत किया गया! इस बिल के अनुछेद 51 व 51ए के अंतर्गत वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-I के अंतर्गत मोर संरक्षित होने के कारण मोर पंख के खरीदने, बेचने, हस्तांतरित करने, व्यापार करने और बेचने हेतु प्रदर्शित करना जुर्म माना गया है और ऐसा करने पर सजा के तौर पर 7 साल तक की कैद और 15 लाख रूपये तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है, परन्तु इस बिल में मोर पंख का धार्मिक उपयोग हेतु छूट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है!

जैसा की सबको विदित है कि मोर पंख का भारत के मुख्य धर्मो में एक विशेष महत्व है और विशेष रूप से जैन धर्म के दिगम्बर संतों द्वारा हजारों वर्षो से मोर द्वारा स्वत: त्यागे गए मोर पंखों से बनी पीछी का उपयोग संयम के उपकरण के रूप में किया जाता है!

वर्ष 2010 में भी वन मंत्रालय द्वारा इसी प्रकार का बिल लाया गया था, तब भी विश्व जैन संगठन द्वारा अपनी याचिका में हजारों सालों से दिगम्बर जैन संतों के मोर पंख से बनी पीछी के उपयोग से सम्बंधित प्रमाणों जिनमें मुख्य रूप से प्राचीन जैन तीर्थों पर उपलब्ध प्राचीन प्रतिमायों में जैन संतो के हाथ में पीछी के फोटो, प्राचीन जैन ग्रंथों में पीछी के महत्व के अतिरिक्त हिन्दू, मुस्लिम आदि धर्मों में मोर पंख के महत्व की जानकारी देते हुए मंत्रालय से निवेदन किया गया था कि मोर पंख को केवल धार्मिक उपयोग हेतु प्रतिबन्ध मुक्त रखा जाये! मंत्रालय ने वर्ष 2010 में इस अधिनियम को स्थगित कर दिया था और विश्व जैन संगठन को सूचना के अधिकार के अंतर्गत लिखित रूप में में भी दिया था!

संजय जैन, अध्यक्ष - विश्व जैन संगठन ने पुन: श्रीमती जयंती नटराजन, केंद्रीय मंत्री - पर्यावरण व वन मंत्रालय से अनुरोध किया कि भारत के मुख्य धर्मो में मोर पंख के धार्मिक उपयोग हेतु प्रतिबन्ध मुक्त रखे जाने हेतु इस बिल में प्रावधान किया जाये और जैन धर्म व हिन्दू धर्म के सभी श्रधालुओं से भी विनम्र निवेदन किया कि सभी अपने स्तर पर वन मंत्रालय से निवेदन करे कि उनकी धार्मिक भावनायों का ध्यान रखते हुए मोर पंख को केवल धार्मिक उपयोग हेतु प्रतिबन्ध मुक्त रखने का बिल में प्रावधान करें अन्यथा इसका सार्वजनिक रूप से विरोध किया जायेगा!

संपर्क करे:- केंद्रीय मंत्री को इ-मेल करे:- jayanti.n@sansad.nic.in या mosefgoi@nic.in अथवा केंद्रीय मंत्री को फैक्स करे:- 011-24362222, 24362016 अथवा श्री बी.एस.भंडारी, उप-सचिव (जन शिकायत), पर्यावरण और वन मंत्रालय, कमरा सं. 911, 9 वीं मंजिल, बी – I विंग, पर्यावरण भवन, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोदी रोड, नई दिल्ली - 3 को लिखे या इ-मेल करे:- bs.bhandari@nic.in
- अमित जैन, सह-मंत्री व प्रवक्ता - विश्व जैन संगठन
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