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घोर तपस्वी साधक और प्रकांड विद्वान जैन मुनि क्षमा सागर महाराज की समाधी

 



नई दिल्ली 14 मार्च ….घोर तपस्वी संत ,दार्शनिक और दिगंबर जैन परंपरा के साधक मुनि श्री 108 क्षमासागरजी ने सागर, मध्यप्रदेश मे समाधि ग्रहण कर ली, समाधिमरण के बाद निकली पद्मासन पालकी शोभायात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। हजारों की संख्या में मौजूद लोग मुनिश्री के अंतिम विहार के साक्षी बने वे पिछले कुछ वर्षो से काफी बीमार चल रहे थे और पूरी तरह से अशक्त हो चुके थे लेकिन गंभीर स्वास्थ्य मे भी उन्होने कठोर मुनि चर्या का पालन जारी रखा. प्रकांड विद्वान रहे मुनिश्री प्रेरक संत आचार्य विद्यासागर के संघ से जुड़े थे, एम टेक की शिक्षा प्राप्त मुनिश्री शिक्षा ग्रहण करने के समय से ही अध्यात्म की तरफ बढ चुके थे. शिक्षा पूरी होने के उपरांत उन्होने नौकरी या व्यवसाय करने की बजाय आचार्य विद्यासागर से प्रेरित हो मुनि दीक्षा ले ली. आचार्यश्री की ज्ञान साधना और तप उनके लिये सदैव प्रेरक रहे और वे अंत समय तक उसका अनुसरण करते रहे.